ड्रेस वितरण में चल रहा बड़ा गोलमाल,विभागीय अधिकारी और सत्ता पक्ष के नेताओं की मिलीभगत से हो रहा वितरण

संवाददाता महेंद्र सिंह राणा

बच्चो को मानकविहीन ड्रेसो का वितरण

हरदोई।ड्रेस वितरण के जिम्मेदार अपनी कमाई के आगे मानक और बच्चो के शरीर की फिगर को दरकिनार करके आंखे मूंद बैठे है।छोटा हो या लंबा या मोटा हो या पतला इस बात से कोई सरोकार नहीं जैसे भी हो ड्रेस वितरण की जिम्मेदारी पूरी हो जाये और कमीशन जेब मे आ जाये।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बच्चों की कुछ इसी तरह से ड्रेस बन रही है।व्यवस्था तो बच्चों की नाप लेकर उनकी फिटिग से ड्रेस सिलवाने की थी,लेकिन सेटिग से काम हो रहा है।एक तो समय पर ड्रेस नहीं बनी दूसरे पूरा काम सेटिग से किया जा रहा है।किसी बच्चे की पैंट बड़ी है तो किसी की शर्ट। छात्राओं को तो ऐसी ड्रेस दे दी गई जोकि लहंगा जैसी दिख रही है।विद्यालयों में चहेती फर्म विद्यालयों की ड्रेस की आपूर्ति में लगी है और अध्यापक न चाहते हुए मानक विहीन ड्रेस की चेक काट कर भुगतान कर रहा है।इस खेल की जानकारी सभी को होने के बावजूद सभी चुप्पी साधे हुए है।जिले में संचालित चार लाख 27 हजार बच्चों को ड्रेस का वितरण किया जाना है। इसके लिए प्रति विद्यार्थी छह सौ रुपये की धनराशि विद्यालय प्रबंधक समिति को भेजी गई।इससे प्रत्येक बच्चे को दो दो ड्रेस उपलब्ध कराई जानी है। शासनादेश के अनुसार ड्रेस के वितरण की जिम्मेदारी प्रबंध समिति की है और वह निर्धारित मानक के अनुसार ड्रेस विद्यार्थियों को दी जानी है।इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है।जिले में ड्रेस के वितरण किया जा रहा है।विभागीय आंकड़ों के अनुसार 80 से 90 फीसदी बच्चों को ड्रेस उपलब्ध कराई जा चुकी है।मगर जो ड्रेस बच्चों को मिली है।उसमें वह मानक विहीन है,कहीं छोटी,तो कहीं लंबी ड्रेस वितरित की गई।उनकी नाप न लेकर सीधे फर्म ने एक साथ आपूर्ति कर दी।इससे विद्यार्थियों को ड्रेस पहनने में परेशानी हो रही है।वहीं विभागीय जिम्मेदारों की बल्ले बल्ले है और जनपद में कई स्थानों पर पुरानी बनी हुई ड्रेसों का वितरण किया गया है।शासनादेश के अनुसार विद्यालय प्रबंध समिति ड्रेस के लिए पहले फार्म से कपड़ा खरीदेगी।कपड़ा उसी फर्म से लिया जाएगा जो इस बात का प्रमाण पत्र देगी कि वह पंजीकृत है और उसके कपड़े में 33 फीसदी काटन और 67 पॉलिस्टर है।इसके बाद विद्यालय के बच्चों की नाप कराई जाए।इसके बाद स्थानीय दर्जी या स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उसकी सिलाई कराएगी और उनका जन प्रतिनिधियों से वितरण कराएगी।इस पर जिला,ब्लाक व न्याय पंचायत स्तर पर गठित टास्क फोर्स नजर रखेंगी।जिले में मात्र तीन फर्म ऐसी है जिनके पास 33/67 फीसदी का प्रमाण पत्र है।मगर जिले में कई फर्म विद्यालयों में ड्रेस की आपूर्ति कर रही है।उसकी न तो नाप ली जाती है सिर्फ फर्म का व्यक्ति पहुंचता है और विद्यार्थियों की संख्या के सापेक्ष ड्रेस डाल देता है और शिक्षक से चेक की मांग करता है।शिक्षक के विरोध करने पर वह संबंधित अधिकारी व जन प्रतिनिधि का फोन करा देता है।इस कारण बगैर नाम व मानक के ड्रेस वितरित की जा रही है।

इस प्रकार हो रही कमीशनबाजी :

सूत्रों के अनुसार विद्यार्थियों की ड्रेस आपूर्ति कर्ता फर्म को 170 रुपये में मिल जाती है।इसके बाद फर्म के संचालक जिला स्तरीय अधिकारियों से बीस रुपये प्रति ड्रेस की दर से अपनी फर्म को अधिकृत करा लेते है और उनसे फोन करा देते है।इसके बाद आपूर्ति कर्ता 220 से 225 रुपये में विद्यालय में एक ड्रेस उपलब्ध करता है।दोनों ड्रेस पर विद्यालय में 170 रुपये बच जाते है।इनमें से 20 रुपये प्रति छात्र विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष,50 रुपये प्रति छात्र बीईओ,बीस रुपये एनपीआरसी,बीस रुपये आडीटर लेता है और साठ रुपये प्रति छात्र विद्यालय प्रधानाध्यापक को बचते है।बिबिध सूत्रों के द्वारा पता चला है BS Aहरदोई से लेकर ब्लाक के शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिली भगत और नेताओं की मिली भगत से पिहानी की सिली हुई ड्रेसो का बितरण नेता लोग अपने चहेतों से कारोबार मे लिप्त हैं प्रशासन मोन हे